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मैं एड्स हूँ -सुनील कुमार सोनू

मैं एड्स हूँ
एक खतरनाक बीमारी
इसलिए कहता हूँ
रखो एड्स की सही जानकारी.
एड्स ऐसे फैलता है :--
असुरक्षित यौन संबंध बनने से
संक्रमित सुई लगाने से
hiv+ माँ द्वारा नवजात शिशु को स्तनपान कराने से
संक्रमित खून के आदान-प्रदान से
लेकिन एड्स ऐसे नही फैलता है:--
हाथ या गले मिलाने से
चुम्मा या प्यार जताने से
संग रहने से या खाने-पीने से
तिलचट्टा या मच्छर काटने से
एड्स का लक्षण है :--
 लंबे समय तक बुखार रहना
  चेहरे पे बरे-बरे फोरे-फुन्सी हो जाना
   राग प्रतिरोधक क्षमता घट जाना
   लगातार वजन घटते रहना
    आत्मविश्वाश डगमगा जाना
एड्स से बचने के उपाय :--
  नशा से दूर रहें
हमेशा कंडोम का उपयाग करें.
  जोश में आके होश न गवाएँ
 जीवन साथी के संग बफा निभाएं
  homosex, heterosex,groupsex,oralsex&analsex से मीलों दूर रहें.
   जहाँ तक सम्भव हो विद्यार्थी ब्रह्मचर्य-धर्म का पालन करें.
जो एड्स के रोगी हैं :--
उन्हें उचित मान-सम्मान दे
उन्मे जीने की ललक पैदा करें
उनसे ये कहो की ---
"जबतक है साँस जिंदगी की
 तबतक हँसते-गाते रहो !
  शेष बहुत है लम्हें कारवां के,
   बस जीने की ललक जागते रहो !"
    उन्हें रस-गंध-स्पर्श का फ़िर से एहसास कराओ!
      उन्हें प्यार देकर कहो की जिंदगी अभी भी
       बहुत खुबसूरत है किसी नई-नवेली दुल्हन की तरह!

 "अपने हाथों में लेके तेरे हाथ चलेंगे!
    तू दिल अपना छोटा न कर
     हम हर पल तेरे साथ चलेंगे! "


SUNIL KUMAR SONU
36th batch ADC student
room no 318
new ADC hostel
NATIONAL INSTITUTE OF FOUNDRY& FORGE(NIFFT),HATIA,RANCHI
JHARKHAND 834003
cell-- 09852341209,9204696659

हाँ,मैं कलम हूँ - सुनील कुमार सोनू

मैं औरों की तरह नही मित्रा
सजा-संवरा कोई वास्तु नहीं
मुझे गहे बिना आजतक
हुआ कोई अरस्तु नहिं
परिचय क्या दूं अपना
हूँ मै केवल हकीकत
बाकी सारे दिवा-सपना
बेजान हूं पर जन लिए हूं
मृत हूँ पर मुस्कान लिए हूं
मै ही सत्यम -शिवम्- सुन्दरम हूं
आहा ! ठीक कहा आपने,मैं तो कलम हूँ
हाँ,मैं कलम हूँ जिसमें
सुभाष की दृढ़ता है,भगत की निडरता है
शेखर की स्वतंतत्रा है,गाँधी की सहिष्णुता है
हाँ, मैं ही कलम हूँ जो
राणा या झाँसी की तलवार है,कुंवर या तिलक की ललकार है
अभिमन्यु या खुदीराम की वार है,हिमालय या शिवाजी सी पहरेदार है
हाँ, मैं कलम ही हूँ जिसने
तुलसी,कबीरा नानक को अमर किया
भाव- वेदना-संवेदना को सुंदर किया
हाँ, मैं कलम ही हूँ जिसने
एकता-विद्वता-मित्रता का पाठ पढ़ाया
प्रेम-त्याग-संकल्प का जाप कराया
हाँ,मैं कलम हूँ जो
चंदन में आग खोज लेता है
बिरानों में अनुराग खोज लेता हे
हाँ,मैं कलम हूँ जो
बिना मौसम के
गर्मी पैदा करवा दूँ
कहो तो अभी आंखों से
हजारों झरने बहवा दूँ
हाँ,मैं कलम हूँ जो
श्रृष्टि के पहले भी था
और बाद तक रहेगा
अंत में बस यही कहूँगा
देवी-देवता,नर-नारी
पशु-पक्षी या प्राणी संसारी
सारे के सारे विनाशी हैं
एक अकेला कलम है
जो चिर-अविनाशी है


सुनील कुमार सोनू


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