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अन्तर्जाल - श्यामसखा 'श्याम'


वाकई हो तुम कमाल
जब चाहो जहां चाहो
भटको, गाओ, मौज मनाओ
जब चाहो-अपने
अपने खास-निजी
दुखड़े गैरो को सुनाओ
चुगली का डर नहीं है
क्योंकि अन्तर्जाल-अन्तर्जाल है।
मोहल्ला या घर नहीं है
यहां कही बात शून्य में विलीन हो जाती है
अन्तर्जाल की छाती
अन्तरिक्ष से बड़ी छाती है
कवियों की महफिल जमती है
सचमुच बहुत गाढी छनती है
न्याय है धर्म है
साहित्य का मर्म है
राजपथ हैं, पगडंडिया है, रास्ते हैं
लोग कहां-कहां से आकर
कहां-कहां की धूल फ़ांकते हैं|


डेटिंग है-शादी है
चर्च-काबा या परमधाम है
बच्चे जवान बूढे़ सब आते हैं
बोरियत से निजात पाते हैं
अन्तर्जाल काम्पैक्ट फ़्लैटों में
विशाल मैदान-याने सबकी अपनी स्पेस है
और अपने राज़ छिपाने की जगह विशेष है
एक अनोखी ग्रेस [ grace ] है
अबूझ सवाल है
बिन मिट्टी खाद-पानी,
के फूल खिल जाते हैं
रात-दिन दोपहर जब
चाहो दोस्त मिल जाते हैं
बिना-बोले घंटो बतियाते है.
न दरवाजा खटखटाना है
न बेल-बजाना है
न कहीं आना जाना है
बस चूहा[mouse] घुमाना है
सामने मिलता खड़ा जमाना है|


एक बार
मुझे भी एड्वेन्चर का शौक चर्राया
जाने क्या सोच कर
एक फ्रेंच बाला का चौला अपनाया
जो न केवल अलबेली थी
बल्कि दुनिया में बिलकुल अकेली थी
ढूंढ रही थी सहारा
एक राज-कुमार, उसकी किस्मत का सितारा
नेट पर जाल बिछाया
बहुत सजीले जवानो को था मेरा प्रोफ़ाइल भाया।


रोज चैट होती थी
फ़्रेंच बाला बनी मैं कभी हंसती थी
कभी रोती थी
जाने किस-किस के कंधे भिगोती थी
अंत मे एक जवान का रिज्यूम मुझे भाया
कुछ दिन चला यह खेल
फिर मैंने उसका फोटो मंगवाया
जब मेल से फोटो आया
तो मेरा सिर भन्नाया
वो तो निकला पड़ोसी डेरी वाला रामलुभाया
तब जाकर मेरी समझ में अंतर्जाल का भेद आया
कि
जो आप नहीं हैं
पर दबी है जो होने की इच्छा
वह कर पाते हैं
और खुद से खुद को छुपाते हैं
इस तरह अपने सपने पूरे कर जाते हैं


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डॉ० श्यामसखा'श्याम' मौदगल्य का संक्षिप्त परिचय

जन्म: अगस्त  २८, १९४८  [अप्रैल  १, १९४८  विद्यालयी रिकार्ड में]
जन्म स्थान - बेरी वालों का पेच रोहतक
जननी-जनक: श्रीमति जयन्ती देवी,  श्री रतिराम शास्त्री
शिक्षा - एम.बी; बी.एस ; एफ़.सी.जी.पी.
सम्प्रति - निजी नर्सिंग होम
लेखन:
भाषा- हिन्दी, पंजाबी, हरयाणवी व अंग्रेजी में
प्रकाशित पुस्तकें- ३ उपन्यास [नवीनतम-कहां से कहां तक-प्रकाशक-हिन्द पाकेट बुक्स]
२ उपन्यास ,कोई फ़ायदा नहीं हिन्दी,समझणिये की मर-हरयाण्वी में साहित्य अकादमी हरयाणा द्वारा पुरस्कृत;
३ कथा संग्रह-हिन्दी-अकथ ह.सा.अकादमी द्वारा-पुरस्कृत;
१ कथा संग्रह इक सी बेला-पं.सा अका.द्वारा पुरस्कृत;
५ कविता संग्रह प्रकाशित-एक ह,सा.अ.द्वारा अनुदानित
१ ग़ज़ल संग्रह-दुनिया भर के गम थे
१ दोहा-सतसई-औरत वे पांचमां[हरियाण्वी भाषा की पहली दोहा सतसई]
१ लोक-कथा संग्रह-घणी गई-थोड़ी रही-ह.सा.अका.[अनुदानित]
१ लघु कथा संग्रह-नावक के तीर-ह.सा.अका [अनुदानित]

चार कहानियां ह.सा अका. २ तीन-पंजाबी सा.अका द्वारा पुरस्कृत
एक उपन्यास-समझणिये की मर'-एम.ए फ़ाइनल पाठ्यक्रम[ कुरुक्षेत्र वि.विद्यालय मे ]
मेरे साहित्य पर एक शोध-पी.एच.डी हेतु,तीन एम.फिल हेतु सम्पन्न।
सम्पादन-संस्थापक संपादक: मसि-कागद[प्रयास ट्रस्ट की साहित्यिक पत्रिका]-दस वर्ष से
कन्सलटिंग एडीटर: एशिया ऑफ़ अमेरिकन बिबिलोग्राफ़ीक मैगज़ीन-२००५ से
सह-संपादक-प्रथम एडिशन-रोह-मेडिकल मैगज़ीन मेडिकल कालेज रोहतक-१९६७-६८
सम्मान -पुरुस्कार
१ चिकित्सा- रत्न पुरस्कार-इन्डियन मेडिकल एसोशिएशन का सर्वोच्च पुरुस्कार-२००७
२ पं लखमी चंद पुरस्कार [ लोक-साहित्य हेतु ]-२००७
३ छ्त्तीसगढ़ सृजन सम्मान [ मुख्यमंत्री डॉ० रमन सिंह द्वारा ]-२००७
४ अम्बिका प्रसाद दिव्य रजत अलंकरण-२००७
५-कथा बिम्ब-कथापुरस्कार मुम्बई,
६ राधेश्याम चितलांगिया-कथा पुरस्कार- लखनऊ
६ संपादक शिरोमिणि पु.श्रीनाथद्वारा-राजस्थान
सहित-लगभग २५ अन्य सम्मान पुरस्कार
अध्यक्ष[प्रेजिडेन्ट]: इन्डियन मेडिकल एसोशियेशन हरियाणा प्रदेश; २ साल १९९४-९६
संरक्षक: इंडियन,मेडिकल.एसो.हरियाणा-आजीवन
सदस्य: रोटरी इन्टरनेशनल व पदाधिकारी
सदस्य कार्यकारणी: गौड़ब्राह्मण विद्याप्रचारणी सभा
सम्पर्क: मसि-कागद १२ विकास नगर रोह्तक १२४००१
Phone: ०९४१६३५९०१९ .
E-Mail:shyamskha@yahoo.com




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आत्म-विश्लेषण

श्यामसखा 'श्याम'


भला लगता है
आंगन में बैठना
धूप सेंकना

पर इसके लिये
वक़्त कहां ?
वक़्त तो बिक गया
सहूलियतों की तलाश में
और अधिक-और अधिक
संचय की आस में

बीत गये बचपन जवानी
जीवन के अन्तिम दिनों में
हमने वक़्त की कीमत जानी
तब तक तो खत्म हो चुकी थी
नीलामी

हम जैसों ने खरीदे
जमीन के टुकड़े
इक्ट्ठा किया धन
देख सके न
जरा आँख उठा
विस्तरित नभ
लपकती तड़ित
घनघोर गरजते घन
रहे पीते धुएं से भरी हवा
कभी देखा नहीं
बाजू मे बसा
हरित वन

पत्नी ने लगाए
गमलों में कैक्टस
उन पर भी
डाली उचटती सी नज़र

खा गया
हमें तो यारो
दावानल सा बढ़ता
अपना नगर

नगर का
भी, क्या दोष
उसे भी तो हमने गढ़ा
देखते रहे औरों के हाथ
बताते रहे भविष्य
पर अपनी
हथेली को
कभी नहीं पढ़ा

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डॉ० श्यामसखा'श्याम' मौदगल्य का संक्षिप्त परिचय

जन्म-अगस्त २८,१९४८[अप्रैल १,१९४८विद्यालयी रिकार्ड में]
जन्म स्थान-बेरी वालों का पेच रोहतक
जननी-जनक: श्रीमति जयन्ती देवी,श्री रतिराम शास्त्री
शिक्षा -एम.बी; बी.एस ; एफ़.सी.जी.पी.
सम्प्रति- निजी नर्सिंग होम
लेखन-
भाषा- हिन्दी,पंजाबी,हरयाणवी व अंग्रेजी में
प्रकाशित पुस्तकें- ३ उपन्यास[नवीनतम-कहां से कहां तक-प्रकाशक-हिन्द पाकेट बुक्स]
२ उपन्यास ,कोई फ़ायदा नहीं हिन्दी,समझणिये की मर-
हरयाण्वी में साहित्य अकादमी हरयाणा द्वारा पुरस्कृत
३ कथा संग्रह-हिन्दी-अकथ ह.सा.अकादमी द्वारा-पुरस्कृत
१ कथा संग्रह इक सी बेला-पं.सा अका.द्वारा पु.
५ कविता संग्रह प्रकाशित-एक ह,सा.अ.द्वारा अनुदानित
१ ग़ज़ल संग्रह-दुनिया भर के गम थे
१ दोहा-सतसई-औरत वे पांचमां[हरियाण्वी भाषा की पहली दोहा सतसई]
१ लोक-कथा संग्रह-घणी गई-थोड़ी रही-ह.सा.अका.[अनुदानित]
१ लघु कथा संग्रह-नावक के तीर-ह.सा.अका[अनुदानित]
चार कहानियां ह.सा अका.२ तीन-पंजाबी सा.अका द्वारा पुरस्कृत
एक उपन्यास-समझणिये की मर'-एम.ए फ़ाइनल पाठ्यक्रम[कुरुक्षेत्र वि.विद्यालय मे]
मेरे साहित्य पर एक शोध-पी एच डी हेतु,तीन एम.फिल हेतु सम्पन्न।
सम्पादन-संस्थापक संपादक-मसि-कागद[प्रयास ट्रस्ट की साहित्यिक पत्रिका]-दस वर्ष से
कन्सलटिंग एडीटर-एशिया ऑफ़-अमेरिकन बिबिलोग्राफ़ीक मैगज़ीन-२००५ से
सह-संपादक-प्रथम एडिशन-रोह-मेडिकल मैगज़ीन मेडिकल कालेज रोहतक-१९६७-६८
सम्मान -पुरुस्कार
१ चिकित्सा- रत्न पुरस्कार-इन्डियन मेडिकल एसोशिएशन का सर्वोच्च पुरुस्कार-२००७
२ पं लखमी चंद पुरस्कार[ लोक-साहित्य हेतु]-२००७
३ छ्त्तीस गढ़ सृजन सम्मान[मुख्यमंत्री डॉ० रमन सिंह द्वारा]-२००७
४ अम्बिका प्रसाद दिव्य रजत अलंकरण-२००७
५-कथा बिम्ब-कथापुरस्कार मुम्बई,
६ राधेश्याम चितलांगिया-कथा पुरस्कार- लखनऊ
६ संपादक शिरोमिणि पु.श्रीनाथद्वारा-राजस्थान
सहित-लगभग २५ अन्य सम्मान पुरस्कार
अध्यक्ष[प्रेजिडेन्ट]=इन्डियन मेडिकल एसोशियेशन हरियाणा प्रदेश;२साल१९९४-९६
संरक्षक- इंडियन,मेडि.एसो.हरियाणा-आजीवन
सदस्य-रोटरी इन्टरनेशनल व पदाधिकारी
सदस्य कार्यकारणी-गौड़ब्राह्मण विद्याप्रचारणी सभा
सम्पर्क- मसि-कागद १२ विकास नगर रोह्तक १२४००१
घुमन्तू भाष-०९४१६३५९०१९ .
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