• कविगण अपनी रचना के साथ अपना डाक पता और संक्षिप्त परिचय भी जरूर से भेजने की कृपा करें।
  • आप हमें डाक से भी अपनी रचना भेज सकतें हैं। हमारा डाक पता निम्न है।

  • Kavi Manch C/o. Shambhu Choudhary, FD-453/2, SaltLake City, Kolkata-700106

    Email: ehindisahitya@gmail.com


Showing posts with label महेश कुमार वर्मा. Show all posts
Showing posts with label महेश कुमार वर्मा. Show all posts

नव वर्ष के शुभ किरण

नव वर्ष के शुभ किरण

नव वर्ष के शुभ किरण
स्‍वच्‍छ करे मेरा तन व मन
चले एक ऐसा पवन
कि झूम उठे सारा चमन
हर कलियाँ खिलती रहे
हर बगिया महकती रहे
मज़हब की खुशबु उठती रहे
ज्ञान की धारा बहती रहे
नव वर्ष के शुभ किरण
स्‍वच्‍छ करे मेरा तन व मन
स्‍वच्‍छ करे मेरा तन व मन

-------------

सबों को नव वर्ष की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ


जिस बेटे को उंगली पकड़कर


जिस बेटे को उंगली पकड़कर
चलना था सिखलाया
जिसे गोद में रखकर
बोलना था सिखलाया
आज उसी बेटे ने मुझे
धक्का देकर
घर से है निकाला।
घर से है निकाला॥


उसकी पत्नी ने उससे कहा
इस बुढे का रहना मुझे नहीं है भाता
लगाओ इस बुढे को कहीं भी ठिकाना
वरना तोड़ लो मुझसे नाता।
वरना तोड़ लो मुझसे नाता॥


माना उसने प्यारी बीवी की बात
किया मुझपर कटु वचनों की बरसात
बोला उसने,
ऐ बुढा!
तुम्हारा नही है यहाँ कोई काम
चले जाओ यहाँ से
और हमें शान्ति से रहने दो
वरना हाथ-पैर तोड़कर बाहर कर दूंगा
फिर भी नहीं मानोगे तो
जहर देकर मार दूंगा!
जहर देकर मार दूंगा!!
पहले किया मैंने
उसके बात को अनसुना
पर उसने मेरा भोजन बंद किया
व मुझे भूखे ही रखने लगा
फिर एक दिन मुझे
धक्का देकर
घर से भी निकाल दिया।
घर से भी निकाल दिया॥


तब से भटक रहा हूँ
अकेले रह रहा हूँ
कोई नहीं है अब मेरा
सिर्फ ईश्वर ही है सहारा।
सिर्फ ईश्वर ही है सहारा॥


जिस बेटे को उंगली पकड़कर
चलना था सिखलाया
जिसे गोद में रखकर
बोलना था सिखलाया
आज उसी बेटे ने मुझे
धक्का देकर
घर से है निकाला।
घर से है निकाला॥



रचयिता -- महेश कुमार वर्मा

गर तू ना होती - महेश कुमार वर्मा


गर तू ना होती तो कौन मेरे पास होता
गर तू ना होती तो कौन मेरे साथ होता
गर तू ना होती तो कौन मेरा अपना होता
गर तू ना होती तो सारा जहाँ सपना होता
गर तू ना होती तो जीवन नहीं ये पूरा होता
गर तू ना होती तो जीवन ये अधुरा होता
गर तू ना होती तो नहीं ये जीवन होता
गर तू ना होती तो नहीं ये गज़ल होता
कहना है बस एक बार तू मान जा
मान जा मेरे दिल को बहला जा
मान जा जीने का राह दिखा जा
मान जा मेरे जीवन को सँवार जा
गर तू ना होती तो नहीं ये जीवन होता
गर तू ना होती तो नहीं ये गज़ल होता

बकरे की जुबान - महेश कुमार वर्मा

देख देख इस मुर्ख मनुष्य को!!
करता है ये छठ पर्व
चाहता है हजारों कामना
छठ करने के लिए
कितनी सारी व्यवस्था करता है
भगवान से हजारों कामना चाहता है
खरना करता है

उपवास करता है
नदी जाता है
सूर्य को अर्ध्य देता है
ताकि उसकी मनोकामना पूर्ण हो
पर उसका नहाय-खाय
खरना, उपवास
व सूर्य को अर्ध्य देना
सब तब हो जाता है बेकार
जब छठ के तुरत बाद
वह भूल जाता है
अपने धर्म व कर्म को
और करता है
मुझपर बेवजह प्रहार
सिर्फ मैं ही नहीं
मुझ जैसे हजारों

बकरे मारे जाते है
छठ के पारण दिन
लेते हैं ये निर्दयी मनुष्य
बेवजह हमारी जान
नहीं है इन्हें अपने धर्म की पहचान!
नहीं है इन्हें अपने धर्म की पहचान!!

मुर्ख मनुष्य
करके हमारा बध
छठ के अपने पुण्य को
खुद मिटा देता है
और ले आता है
अपने खाते में
सिर्फ पाप ही पाप!

अरे मुर्ख व पापी मनुष्य!

हमें मारकर तुम
तरक्की कर सकते नहीं
शांत तुम रह सकते नहीं
चैन से सो सकते नहीं!
चैन से सो सकते नहीं!!


अरे निर्दयी व कातिल मनुष्य
मेरी गलती मुझे बताओ
मेरा अपराध मझे बताओ
तुमने हमें क्यों मारा?

मुझ बेगुनाहों को क्यों रुलाया?
मुझ बेगुनाहों को क्यों रुलाया??

कहता है तुमसे ये बकरा
अपना भविष्य तुमने ख़ुद है उकेरा
अवश्य मिलेगा तुम्हें हमें मारने का फल

अवश्य मिलेगा तुम्हें हमें मारने का फल
जाएगा तुम्हारा सारा व्रत निष्फल!
जाएगा तुम्हारा सारा व्रत निष्फल!!




रचयिता : महेश कुमार वर्मा

अबकी दिवाली मनाएब कैसे

उजड़ि गेल घर बाढ़ में
डूबि गेल पूँजी व्यापार में
ना बा कहूँ रहे के ठिकाना
ना बा कुछु खाय के ठिकाना
दिया से अपन घर के सजाएब कैसे
जुआड़ी सैंया के हम मनाएब कैसे
अबकी दिवाली हम मनाएब कैसे
अबकी दिवाली हम मनाएब कैसे
ना बा घर ना बा दुआर
ओ भगवान तोहार मूर्ति हम बिठाएब कैसे
तोहार आरती हम उतारब कैसे
हो अबकी दिवाली हम मनाएब कैसे
अबकी दिवाली हम मनाएब कैसे

रचयिता - महेश कुमार वर्मा

रिश्ता - महेश कुमार वर्मा

रचयिता :
महेश कुमार वर्मा
पटना (बिहार)
Website : http://popularindia.blogspot.com/
E-mail ID : vermamahesh7@gmail.com
Contact No. : +919955239846



1. ये रिश्ता चीज होती है क्या
-------------------------------

पता नहीं चलता ये रिश्ता चीज होती है क्या
अरे कोई तो बताए ये रिश्ता चीज होती क्या
था कभी भाई-भाई का रिश्ता
कभी न बिछुड़ने वाला रिश्ता
जो हमेशा साथ-साथ खेलता
हमेशा साथ-साथ पढ़ता
हमेशा साथ-साथ खाता
हमेशा साथ-साथ रहता
पर आज जब वे बड़े व समझदार हुए
तो दोनों एक-दूसरे के दुश्मन हुए
हथियार लेकर दोनों आमने-सामने हुए
भाई-भाई का रिश्ता दुश्मनी में बदल गया
पता नहीं चलता ये रिश्ता चीज होती है क्या
अरे कोई तो बताए ये रिश्ता चीज होती क्या
किया था शादी पति-पत्नी के रिश्ता के साथ
जीवन भर साथ निभाने को
पर रह गयी दहेज़ में कमी
तो न दिया उसे साथ रहने को
और जिन्दा ही पत्नी को जला डाला
क्योंकि था वह दहेज़ के पीछे मतवाला
था वह दहेज़ के पीछे मतवाला
जीवन भर साथ निभाने का रिश्ता
दुश्मनी में बदल गया
पता नहीं चलता ये रिश्ता चीज होती है क्या
अरे कोई तो बताए ये रिश्ता चीज होती क्या
था पिता-पुत्र का रिश्ता
पिता ने उसे अपने बुढ़ापे का सहारा समझा
पर उसने तो दुश्मन से भी भयंकर निकला
निकाल दिया पिता को घर से
भूखे-प्यासे छोड़ दिया
नहीं मरा पिता तो उसने
जहर देकर मार दिया
बुढ़ापे का सहारा आज उसी का कातिल बना
था इन्सान पर आज वह हैवान बना
पता नहीं चलता ये रिश्ता चीज होती है क्या
अरे कोई तो बताए ये रिश्ता चीज होती क्या
ये रिश्ता चीज होती है क्या
2. बहुत ही नाजुक होती है ये रिश्ते
-------------------------------------

बहुत ही नाजुक होती है ये रिश्ते
निभा सको तो साथ देगी जीवन भर ये रिश्ते
नहीं तो सिर्फ कहलाने को रह जाएँगे ये रिश्ते
बनते हैं पल भर में, बिगड़ते हैं पल भर में ये रिश्ते
बहुत ही नाजुक होती है ये रिश्ते
बहुत ही नाजुक होती है ये रिश्ते
*
***
*****
*******
*****
***
*

मंजिल - महेश कुमार वर्मा


1. हमें अपनी मंजिल को पाना है


हमें अपनी मंजिल को पाना है
हर चुनौती को स्वीकारना है
राह में चाहे जो भी बाधा आए
दुश्मन चाहे लाखों कांटा बिछाए
हरेक बाधा को तोड़ना है
हमें अपनी मंजिल को पाना है
जीवन में आगे बढ़ना है
जीवन में आगे बढ़ना है
हमें अपनी मंजिल को पाना है


2. अपना कर्म करते जा

अपना कर्म करते जा
जीवन में आगे बढ़ते जा
देखो कभी न तुम मुड़कर
सोचो कभी न तुम रूककर
हर परिस्थिति में बढ़ते जा
हर बाधा को तोड़ते जा
अपना कर्म करते जा
जीवन में आगे बढ़ते जा



परिचय:
नाम: महेश कुमार वर्मा,
शिक्षा : प्राथमिक / मध्य विद्यालय : राजकीय कन्या मध्य विद्यालय, छत्तरपुर, पलामू (झारखण्ड); उच्च विद्यालय : राजकीय संपोषित उच्च विद्यालय, छत्तरपुर, पलामू (झारखण्ड); मैट्रिक : राजकीय संपोषित उच्च विद्यालय, छत्तरपुर, पलामू (झारखण्ड); बोर्ड : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना; वर्ष : 1993; इंटर --I.Sc. (Math) : B. D. Evening College, Patna; बोर्ड : Bihar Intermediate Education Council, Patna; वर्ष : 1995
वर्तमान पता: DTDC कुरियर ऑफिस, सत्यनारायण मार्केट, मारुती (कारलो) शो रूम के सामने, बोरिंग रोड, पटना (बिहार), पिन : 800001 (भारत);
Contact No. : +919955239846



क्रमांक सूची में वापस जाएं

महेश कुमार वर्मा के दो कविताएँ :


1. मेरे देश की कहानी


सुनो! सुनो! ऐ दुनिया वालों, सुनो! देश की नई कहानी
जहाँ रोज घटता~ ~ घोटाला! और होती बेईमानी!
भ्रष्ट्राचार संसद में नाचा, देश की हुई यही निशानी।
सुनो! सुनो! ऐ दुनिया वालों, सुनो! देश की नई कहानी
बेईमानी, घुसखोरी रग-रग में फैली
इसी पर टिकी सरकार की गाड़ी।
बढ़ रहे हैं बढ़ रहे हैं बढ़ते ही रहेंगे
भ्रष्ट्राचार को ये खिलाड़ी।
तड़पते और मरते ही रहेगें
किसान बने देश के भीखारी।
कुछ नहीं है इनका विचार
जो देश को करता हो महान।
सुनो! सुनो! ऐ दुनिया वालों, सुनो! देश की नई कहानी
जहाँ रोज घटता~ ~ घोटाला! और होती बेईमानी!
पुरुष हो या महिला, गरीब हो या लाचार
सबों के साथ हो रहा अत्याचार
यही है इनकी शक्ति का आधार
अरे! ये नई नहीं, यह बात तो है वर्षों पुरानी
यहाँ हमेशा होती रही, बेईमानी ही बेईमानी।
यही है इस देश की कहानी,
नई नहीं बस वही है कहानी
यही है मेरे देश की कहानी
यही है मेरे देश की कहानी।


2. इंसान नहीं हैवान हैं हम


इंसान नहीं हैवान हैं हम
मारते बेकसूर जीव को और
भरते अपना पेट हैं हम
इंसान नहीं हैवान हैं हम
इंसान नहीं हैवान हैं हम
मत कहो हमें सर्वाधिक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणी
हम रोज करते हैं बेईमानी ही बेईमानी
करते हैं अत्याचार
होती है बलात्कार
देते हैं रिश्वत
कोई नहीं करता है बहिष्कार
एक दिन नहीं रोज का है धंधा
पहुंचाते हैं पैसा
डालते हैं डाका
देते हैं उसे भी आधा
पैसे दो मौज मनाओ
कुछ न कहेंगे कुछ न करेंगे
अपना काम करते रहो
वे यों ही सोते रहेंगे
पीड़ित के आने पर हंटर ही लगाएंगे
वे पुलिस हैं पुलिस ही कहलाएंगे
यह थी हमारी एक झलक
होती है यहाँ अत्याचार झपकते ही पलक
अन्याय करने में सब है मतवाला
जो जितना बड़ा उसका मुँह उतना ही काला
मत कहो हमें सर्वाधिक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणी
हम तो हैं दुनियाँ के सर्वाधिक खतरनाक प्राणी
इंसान नहीं हैवान हैं हम
कलियुग के शैतान हैं हम
कलियुग के शैतान हैं हम
इंसान नहीं हैवान हैं हम
इंसान नहीं हैवान हैं हम



परिचय:
नाम: महेश कुमार वर्मा,
शिक्षा : प्राथमिक / मध्य विद्यालय : राजकीय कन्या मध्य विद्यालय, छत्तरपुर, पलामू (झारखण्ड); उच्च विद्यालय : राजकीय संपोषित उच्च विद्यालय, छत्तरपुर, पलामू (झारखण्ड); मैट्रिक : राजकीय संपोषित उच्च विद्यालय, छत्तरपुर, पलामू (झारखण्ड); बोर्ड : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना; वर्ष : 1993; इंटर --I.Sc. (Math) : B. D. Evening College, Patna; बोर्ड : Bihar Intermediate Education Council, Patna; वर्ष : 1995
वर्तमान पता: DTDC कुरियर ऑफिस, सत्यनारायण मार्केट, मारुती (कारलो) शो रूम के सामने, बोरिंग रोड, पटना (बिहार), पिन : 800001 (भारत);
Contact No. : +919955239846



क्रमांक सूची में वापस जाएं